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वास्तु अनुसार
जल समस्याओं से बचाव

पश्चिम दिशा में घर की योजना वास्तु अनुसार

वास्तु शास्त्र के अनुसार पश्चिम दिशा में घर बनाने के लिए

December 13, 2025
4 min read
पश्चिम दिशा में घर की योजना वास्तु अनुसार

परिचय

वास्तु शास्त्र एक प्राचीन भारतीय विज्ञान है जो हमारे घरों और भवनों की दिशा और संरचना को निर्धारित करने में मदद करता है। यह हमारे जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डालता है और हमें शांति, समृद्धि और खुशी प्रदान करता है।

पश्चिम दिशा में घर की योजना बनाने के लिए वास्तु शास्त्र के अनुसार क्या है?

पश्चिम दिशा में घर की योजना बनाने के लिए वास्तु शास्त्र के अनुसार एक विशेष महत्व रखता है। यह दिशा भगवान वरुण की दिशा मानी जाती है, जो जल और समृद्धि के देवता हैं। इस दिशा में घर बनाने से हमें जल संबंधी समस्याओं से बचाया जा सकता है और समृद्धि प्राप्त की जा सकती है।

पश्चिम दिशा में घर की योजना बनाने के लिए वास्तु शास्त्र के अनुसार मुख्य सिद्धांत

पश्चिम दिशा में घर की योजना बनाने के लिए वास्तु शास्त्र के अनुसार एक विशेष महत्व रखता है।

Direction Rules

  • घर का मुख्य द्वार पश्चिम दिशा में होना चाहिए।
  • बेडरूम और बच्चों के कमरे पूर्व या उत्तर दिशा में होने चाहिए।
  • रसोईघर दक्षिण-पश्चिम दिशा में होना चाहिए।
  • शौचालय और स्नानागार दक्षिण-पूर्व दिशा में होने चाहिए।
  • घर की सजावट में पश्चिम दिशा की ओर खुली जगह होनी चाहिए।

आदर्श वास्तु लेआउट / दिशा नियम

पश्चिम दिशा में घर की योजना बनाने के लिए वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के अंदर ऊर्जा का प्रवाह सुचारू रूप से होना चाहिए। इसके लिए हमें निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:

Room Positions

  • घर का मुख्य द्वार पश्चिम दिशा में होना चाहिए।
  • बेडरूम और बच्चों के कमरे पूर्व या उत्तर दिशा में होने चाहिए।
  • रसोईघर दक्षिण-पश्चिम दिशा में होना चाहिए।

Entrance Rules

  • घर का मुख्य द्वार पश्चिम दिशा में होना चाहिए।

Energy Flow

  • घर की सजावट में पश्चिम दिशा की ओर खुली जगह होनी चाहिए।

आम गलतियाँ जिनसे बचना चाहिए

पश्चिम दिशा में घर की योजना बनाने के लिए वास्तु शास्त्र के अनुसार, हमें निम्नलिखित गलतियों से बचना चाहिए:

  • घर का मुख्य द्वार दक्षिण या पूर्व दिशा में नहीं होना चाहिए।
  • बेडरूम और बच्चों के कमरे पश्चिम दिशा में नहीं होने चाहिए।
  • रसोईघर उत्तर-पश्चिम दिशा में नहीं होना चाहिए।
  • शौचालय और स्नानागार पूर्व या पश्चिम दिशा में नहीं होने चाहिए।
  • घर की सजावट में दक्षिण या पूर्व दिशा की ओर खुली जगह नहीं होनी चाहिए।

सही वास्तु का पालन करने के लाभ

पश्चिम दिशा में घर की योजना बनाने के लिए वास्तु शास्त्र के अनुसार, हमें निम्नलिखित लाभ हो सकते हैं:

  • समृद्धि और सुख
  • जल संबंधी समस्याओं से बचाव
  • घर में ऊर्जा का सुचारू प्रवाह
  • अच्छी सेहत और दीर्घायु
  • परिवार में सौहार्द और शांति

विशेषज्ञ टिप्स

पश्चिम दिशा में घर की योजना बनाने के लिए वास्तु शास्त्र के अनुसार, हमें निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:

  • घर की योजना बनाने से पहले वास्तु शास्त्र के अनुसार सलाह लेनी चाहिए।
  • घर की सजावट में पश्चिम दिशा की ओर खुली जगह होनी चाहिए।
  • घर में पौधे लगाने से ऊर्जा का प्रवाह सुचारू होता है।

निष्कर्ष

पश्चिम दिशा में घर की योजना बनाने के लिए वास्तु शास्त्र के अनुसार एक विशेष महत्व रखता है, जो भगवान वरुण की दिशा मानी जाती है। इस दिशा में घर बनाने से हमें जल संबंधी समस्याओं से बचाया जा सकता है और समृद्धि प्राप्त की जा सकती है। हमें वास्तु शास्त्र के अनुसार घर की योजना बनाने में ध्यान रखना चाहिए, ताकि हमें सही दिशा में ऊर्जा का प्रवाह मिल सके।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

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